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छत्तीसगढ़ शासन नगर पालिक निगम, दुर्ग Municipal Corporation Durg, Chhattisgarh

दुर्ग के बारे में

शिवनाथ नदी के तट पर बसा, दुर्ग-भिलाई शहरी क्षेत्र का प्रमुख शहर एवं दुर्ग जिले का मुख्यालय

अक्षांश

20°23' – 22°02' उत्तर

देशांतर

80°46' – 81°58' पूर्व

समुद्र तल से ऊँचाई

317 मीटर

जिले का क्षेत्रफल

8701.80 वर्ग कि.मी.

जनसंख्या (जनगणना 2001)

28,10,436

एसटीडी कोड / पिन

0788 / 491001

परिचय

दुर्ग छत्तीसगढ़ राज्य का एक प्रमुख शहर है, जो मध्य भारत में शिवनाथ नदी के पूर्व में स्थित है और दुर्ग-भिलाई शहरी समूह का हिस्सा है। यह दुर्ग जिले का मुख्यालय है।

स्थान

दुर्ग जिला छत्तीसगढ़ का एक घनी आबादी वाला जिला है। यह छत्तीसगढ़ मैदान के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित है तथा दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम एवं उत्तर-पश्चिम में खनिज संसाधनों और वनों से समृद्ध पहाड़ी क्षेत्र से घिरा है।

राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 6 (मुंबई – संबलपुर – कोलकाता) जिले का प्रमुख राजमार्ग है तथा मुंबई-कोलकाता के बीच दक्षिण पूर्व रेलवे की मुख्य लाइन जिले से होकर गुजरती है। जिला मुख्यालय दुर्ग से निकटतम हवाई अड्डा माना (रायपुर) लगभग 50 कि.मी. दूर है।

भूगोल

जिला ऊपरी शिवनाथ-महानदी घाटी के पश्चिमी भाग तथा दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम सीमा से सटी पहाड़ियों में स्थित है। भौगोलिक रूप से जिले को दो भागों – छत्तीसगढ़ मैदान और दक्षिणी पठार – में विभाजित किया जा सकता है। जिले का सबसे बड़ा क्षेत्र छत्तीसगढ़ मैदान है।

जिले की अधिकतम, औसत एवं न्यूनतम वार्षिक वर्षा क्रमशः 1477.2 मि.मी., 1071.16 मि.मी. और 781.5 मि.मी. है।

जिले का सामान्य ढलान उत्तर, उत्तर-पूर्व और पूर्व की ओर है। शिवनाथ और खारून नदियाँ जिले की जल निकासी व्यवस्था में सबसे अधिक योगदान करती हैं। सभी छोटे नाले एवं नदियाँ इन्हीं की सहायक हैं। शिवनाथ नदी जिले की पश्चिमी सीमा के निकट बहती है, जबकि खारून नदी पूर्वी सीमा बनाती है और अंततः शिवनाथ नदी में मिलती है। शिवनाथ स्वयं महानदी बेसिन का हिस्सा है।

वन क्षेत्र 9.01% अर्थात 730 वर्ग कि.मी. है।

जलवायु: जिले की जलवायु सामान्यतः शुष्क उष्णकटिबंधीय है। गर्मी में तापमान मई/जून में चरम पर पहुँचता है और 45°C तक जा सकता है। मानसून सामान्यतः जुलाई से सितंबर तक रहता है। मानसून के बाद दिसंबर-जनवरी तक औसत तापमान 32°C से लगभग 12°C के बीच रहता है।

कला और संस्कृति

छत्तीसगढ़ अपनी सांस्कृतिक विरासत में समृद्ध है। राज्य की संस्कृति अत्यंत अनोखी और जीवंत है। यहाँ 35 से अधिक छोटी-बड़ी जनजातियाँ निवास करती हैं, जिनका लयबद्ध लोक संगीत, नृत्य और नाटक राज्य की संस्कृति की झलक देते हैं। पंडवानी, राउत नाचा, पंथी और सुआ यहाँ की प्रसिद्ध लोक शैलियाँ हैं।

पंडवानी: पंडवानी छत्तीसगढ़ की प्रमुख लोक गायन शैली है, जिसमें महाभारत के पांडवों की कथा अत्यंत जीवंत रूप में सुनाई जाती है। मुख्य कलाकार एकतारा हाथ में लेकर कथा प्रस्तुत करता है और सहयोगी गायक-वादक साथ देते हैं। इसकी दो शैलियाँ हैं – वेदमती, जिसमें कलाकार बैठकर कथा कहता है, और कापालिक, जिसमें कलाकार पात्रों का अभिनय करते हुए कथा प्रस्तुत करता है।

दुर्ग जिले के गनियारी गाँव की तीजनबाई ने कापालिक शैली को देश-विदेश में लोकप्रिय बनाया। उन्हें 1988 में पद्मश्री, 1994 में श्रेष्ठ कला आचार्य, 1996 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए तथा 2002 में गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर ने उन्हें डी.लिट. की उपाधि प्रदान की। रूआबांधा, भिलाई की ऋतु वर्मा ने भी कापालिक शैली अपनाई है, तथा रिंगनी गाँव के श्री पूनाराम निषाद वेदमती शैली के प्रसिद्ध कलाकार हैं।

पंथी: छत्तीसगढ़ के सतनामी समुदाय का धार्मिक लोक नृत्य, जो माघी पूर्णिमा पर गुरु बाबा घासीदास की जयंती पर जैतखाम के चारों ओर किया जाता है। लय तेज होने पर नर्तक कलाबाजी करते हुए मानव पिरामिड भी बनाते हैं। इसमें मांदर और झांझ प्रमुख वाद्य हैं।

राउत नाचा: यादव समुदाय का पारंपरिक लोक नृत्य, जो देवउठनी एकादशी के समय भगवान कृष्ण की आराधना के प्रतीक के रूप में किया जाता है।

पर्यटन

श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ, नगपुरा: शिवनाथ नदी के किनारे 1995 में स्थापित जैन तीर्थ, जिसके परिसर में मंदिर, अतिथि गृह, उद्यान तथा प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग केंद्र हैं। मंदिर का 30 फुट ऊँचा प्रवेश द्वार चार स्तंभों पर टिका है। पूर्णिमा पर सैकड़ों तीर्थयात्री यहाँ आते हैं।

मैत्री बाग: भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा संचालित चिड़ियाघर सह बच्चों का पार्क। यहाँ के मुख्य आकर्षण विदेशी पशु-पक्षी, सफेद बाघ, झील, खिलौना ट्रेन तथा कृत्रिम झील के द्वीप पर स्थित संगीतमय फव्वारा हैं। हर वर्ष यहाँ पुष्प प्रदर्शनी आयोजित की जाती है।

कनेक्टिविटी

हवाई मार्ग: जिला मुख्यालय दुर्ग से निकटतम हवाई अड्डा माना (रायपुर) लगभग 50 कि.मी. दूर है।

सड़क मार्ग: जिला सड़कों से भली-भाँति जुड़ा है। मुंबई-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 6 जिले से होकर गुजरता है। अन्य प्रमुख मार्ग – दुर्ग-धमधा-बेमेतरा, कवर्धा-बेमेतरा-सिमगा, कुम्हारी-पथरिया, राजनांदगांव-अंतागढ़ एवं दुर्ग-उतई मार्ग हैं।

रेल मार्ग: दुर्ग शहर मुंबई-कोलकाता के बीच दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की मुख्य लाइन पर स्थित है। लौह अयस्क परिवहन हेतु दुर्ग से दल्ली-राजहरा तक शाखा लाइन भी है।