स्मार्ट सिटी की संकल्पना
स्मार्ट सिटी की कोई सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत परिभाषा नहीं है। अलग-अलग लोगों के लिए इसका अर्थ अलग होता है। इसकी संकल्पना शहर-दर-शहर और देश-दर-देश, विकास के स्तर, परिवर्तन और सुधार की इच्छा, संसाधनों तथा निवासियों की आकांक्षाओं पर निर्भर करती है। भारत में किसी भी शहरवासी की कल्पना में स्मार्ट सिटी की तस्वीर उन बुनियादी सुविधाओं और सेवाओं की सूची है जो उसकी आकांक्षाओं को दर्शाती है।
नागरिकों की आकांक्षाओं और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शहरी योजनाकार आदर्श रूप से पूरे शहरी तंत्र का विकास करते हैं, जो संस्थागत, भौतिक, सामाजिक और आर्थिक अवसंरचना – इन चार स्तंभों पर आधारित है। शहर चरणबद्ध रूप से ऐसी व्यापक अवसंरचना विकसित करते हुए उसमें "स्मार्टनेस" की परतें जोड़ सकते हैं।
स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य ऐसे शहरों को बढ़ावा देना है जो मूलभूत अवसंरचना प्रदान करें, नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण जीवन, स्वच्छ एवं टिकाऊ पर्यावरण दें तथा "स्मार्ट" समाधानों का उपयोग करें। ध्यान सतत और समावेशी विकास पर है, ताकि ऐसे अनुकरणीय मॉडल बनें जो अन्य शहरों के लिए प्रकाश स्तंभ का कार्य करें।