मुख्य सामग्री पर जाएँ
छत्तीसगढ़ शासन नगर पालिक निगम, दुर्ग Municipal Corporation Durg, Chhattisgarh

दुर्ग का इतिहास

1 जनवरी 1906 को गठित दुर्ग जिले की ऐतिहासिक यात्रा

  1. 10वीं शताब्दी

    जगपाल द्वारा नगर की स्थापना

  2. 1741

    मराठों ने दुर्ग को छत्तीसगढ़ अभियान का आधार बनाया

  3. 1 जनवरी 1906

    दुर्ग जिले का गठन

  4. 26 जनवरी 1973

    राजनांदगांव जिला अलग हुआ

  5. 6 जुलाई 1998

    कबीरधाम जिला अस्तित्व में आया

  6. 1 जनवरी 2012

    बेमेतरा और बालोद जिले बने

जिले का गठन

दुर्ग जिले का गठन 1 जनवरी 1906 को रायपुर और बिलासपुर जिलों के क्षेत्रों को लेकर किया गया। उस समय आज के राजनांदगांव और कबीरधाम (कवर्धा) जिले भी दुर्ग जिले का हिस्सा थे। 1906 से पहले दुर्ग, रायपुर जिले की एक तहसील था। गठन के समय इसमें दुर्ग, बेमेतरा और बालोद – तीन तहसीलें थीं।

26 जनवरी 1973 को दुर्ग जिले का विभाजन कर राजनांदगांव जिला बनाया गया। 6 जुलाई 1998 को राजनांदगांव का विभाजन कर कबीरधाम जिला अस्तित्व में आया। 1 जनवरी 2012 को दुर्ग जिले से पुनः बेमेतरा और बालोद दो नए जिले बनाए गए।

नाम एवं प्राचीन इतिहास

दुर्ग नाम से ही संकेत मिलता है कि यह दक्षिण कोशल में ऐतिहासिक परिवर्तनों के दौरान एक सुदृढ़ किलेबंद स्थान रहा होगा।

प्रतीत होता है कि नगर की स्थापना लगभग 10वीं शताब्दी ईस्वी में जगपाल ने की, जो मिर्जापुर के बघेलदेश से आकर रतनपुर के राजा रत्नदेव के कोषाधिकारी बने। राजा ने उनकी सराहनीय सेवा से प्रसन्न होकर उन्हें 700 गाँवों सहित दुर्ग पुरस्कार में दिया। एक शिलालेख में शिवदेव नामक राजा तथा शिवपुर एवं शिवदुर्ग का उल्लेख है। संभवतः शिवनाथ नदी से जुड़ा "शिवदुर्ग" नाम ही धीरे-धीरे "दुर्ग" बन गया।

मराठों ने 1741 में छत्तीसगढ़ पर अधिकार के अभियान में दुर्ग को अपना आधार बनाया। किले के अतिरिक्त उन्होंने एक ऊँचे स्थान पर शिविर बनाया, जहाँ से आसपास का विहंगम दृश्य दिखता है।

यहाँ बुद्ध की एक छोटी मस्तकविहीन प्रतिमा तथा बुद्धकालीन कई मूर्तियाँ मिली हैं। किले के भीतर जगपाल द्वारा निर्मित बताया जाने वाला हनुमान मंदिर स्थित है। शहर में "हरपा-दांढे" नामक एक बड़ा तालाब है।

आधुनिक दुर्ग

भिलाई इस्पात संयंत्र की स्थापना के बाद यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ का सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र बन गया है। इससे न केवल इस्पात संयंत्र में रोजगार के अवसर मिले, बल्कि अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों को भी गति मिली, जो दुर्ग में आर्थिक गतिविधियों की उज्ज्वल संभावनाओं को दर्शाता है।